श्री ब्रह्मा चालीसा – Shri Brahma Chalisa In Hindi | English

Shri Brahma Chalisa In Hindi – In Hindu religion, Brahma Dev is said to be creator of Hinduism. इस पोस्ट में हम श्री ब्रह्मा चालीसा (Shri Brahma Chalisa ) हिंदी में शेयर कर रहे है। इसका जाप करके आदिक से आदिक लोग लाभ उठा सके। Providing Shri Brahma Chalisa Lyrics in Hindi and English. Benefits of Brahma Chalisa.

Brahma is also known as Vedanatha (Gods of Vedas), Gyaneshwar (God of Knowledge), Chaturmukha, Svayambhu, and Brahmanarayana.


Shri Brahma Chalisa In Hindi

॥ दोहा॥

जय ब्रह्मा जय स्वयम्भू,
चतुरानन सुखमूल।

करहु कृपा निज दास पै,
रहहु सदा अनुकूल।

तुम सृजक ब्रह्माण्ड के,
अज विधि घाता नाम।

विश्वविधाता कीजिये,
जन पै कृपा ललाम।

॥ चौपाई ॥

जय जय कमलासान जगमूला,
रहहू सदा जनपै अनुकूला।

रुप चतुर्भुज परम सुहावन,
तुम्हें अहैं चतुर्दिक आनन।

रक्तवर्ण तव सुभग शरीरा,
मस्तक जटाजुट गंभीरा।

ताके ऊपर मुकुट विराजै,
दाढ़ी श्वेत महाछवि छाजै।

श्वेतवस्त्र धारे तुम सुन्दर,
है यज्ञोपवीत अति मनहर।

कानन कुण्डल सुभग विराजहिं,
गल मोतिन की माला राजहिं।

चारिहु वेद तुम्हीं प्रगटाये,
दिव्य ज्ञान त्रिभुवनहिं सिखाये।

ब्रह्मलोक शुभ धाम तुम्हारा,
अखिल भुवन महँ यश विस्तारा।

अर्द्धागिनि तव है सावित्री,
अपर नाम हिये गायत्री।

सरस्वती तब सुता मनोहर,
वीणा वादिनि सब विधि मुन्दर।

कमलासन पर रहे विराजे,
तुम हरिभक्ति साज सब साजे।

क्षीर सिन्धु सोवत सुरभूपा,
नाभि कमल भो प्रगट अनूपा।

तेहि पर तुम आसीन कृपाला,
सदा करहु सन्तन प्रतिपाला।

एक बार की कथा प्रचारी,
तुम कहँ मोह भयेउ मन भारी।

कमलासन लखि कीन्ह बिचारा,
और न कोउ अहै संसारा।

तब तुम कमलनाल गहि लीन्हा,
अन्त विलोकन कर प्रण कीन्हा।

कोटिक वर्ष गये यहि भांती,
भ्रमत भ्रमत बीते दिन राती।

पै तुम ताकर अन्त न पाये,
ह्वै निराश अतिशय दुःखियाये।

पुनि बिचार मन महँ यह कीन्हा
महापघ यह अति प्राचीन।

याको जन्म भयो को कारन,
तबहीं मोहि करयो यह धारन।

अखिल भुवन महँ कहँ कोई नाहीं,
सब कुछ अहै निहित मो माहीं।

यह निश्चय करि गरब बढ़ायो,
निज कहँ ब्रह्म मानि सुखपाये।

गगन गिरा तब भई गंभीरा,
ब्रह्मा वचन सुनहु धरि धीरा।

सकल सृष्टि कर स्वामी जोई,
ब्रह्म अनादि अलख है सोई।

निज इच्छा इन सब निरमाये,
ब्रह्मा विष्णु महेश बनाये।

सृष्टि लागि प्रगटे त्रयदेवा,
सब जग इनकी करिहै सेवा।

महापघ जो तुम्हरो आसन,
ता पै अहै विष्णु को शासन।

विष्णु नाभितें प्रगट्यो आई,
तुम कहँ सत्य दीन्ह समुझाई।

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